नगर निगम का बड़ा एक्शन! GM और चीफ इंजीनियर समेत कई अफसरों को नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब

लखनऊ: नगर निगम की विकास परियोजनाओं में देरी और लापरवाही सामने आने के बाद नगर आयुक्त ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। 15वें वित्त आयोग, अमृत योजना 2.0, अवस्थापना निधि, वायु गुणवत्ता सुधार और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कार्यों की समीक्षा में कई परियोजनाएं अधूरी और तय लक्ष्य से काफी पीछे मिलीं। इसके बाद जलकल के महाप्रबंधक, एक चीफ इंजीनियर समेत कई संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।

समीक्षा में कई परियोजनाओं की प्रगति मिली असंतोषजनक

19 सितंबर को हुई समीक्षा बैठक में सामने आया कि कई महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। इसके बाद 26 सितंबर को जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो शासन को अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति भेजी जाएगी।

किस अधिकारी पर क्या जिम्मेदारी और आरोप

मुख्य अभियंता (विद्युत) मनोज कुमार प्रभात के जिम्मे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ट्रैक्टर, रोड रोलर और एक्सीवेटर जैसे वाहनों की खरीद के साथ वायु गुणवत्ता सुधार के तहत वाटर फाउंटेन लगाने का काम था। समीक्षा के दौरान इन कार्यों की प्रगति असंतोषजनक पाई गई।

महाप्रबंधक जलकल कुलदीप सिंह से 15वें वित्त आयोग के तहत पेयजल आपूर्ति और नलकूप निर्माण से जुड़े कार्यों में अपेक्षित वित्तीय और भौतिक प्रगति नहीं होने को लेकर जवाब मांगा गया है।

पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान के अधीन डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण, एमआरएफ स्टेशन, शिवरी वेस्ट प्लांट और सार्वजनिक शौचालय निर्माण जैसे कार्यों की प्रगति भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं मिली। इन कार्यों में लापरवाही सामने आने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

पार्क और झीलों के विकास कार्यों में भी देरी

उद्यान अधीक्षक शशिकांत के जिम्मे मियावाकी पौधारोपण, पार्कों के सौंदर्यीकरण और कालिदास चौराहे पर वर्टिकल गार्डन विकसित करने के कार्य थे। समीक्षा में इन कार्यों के समय पर पूरा नहीं होने की बात सामने आई।

सहायक अभियंता आलोक कुमार श्रीवास्तव पर अमृत योजना के तहत राधा तालाब, प्रेम तालाब और हैबतमऊ झील के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्यों में देरी और लापरवाही का आरोप है। वहीं सहायक अभियंता झिल्लू राम से सीएसआर फंड से बनने वाले ओपन जिम और अन्य कार्यों में देरी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

गलत पीपीटी तैयार करने पर दो कर्मचारियों का वेतन रोका

नगर निगम की कार्रवाई केवल अभियंताओं और अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। समीक्षा बैठक के लिए बजट और भुगतान से जुड़ी अधूरी एवं त्रुटिपूर्ण पीपीटी तैयार करने पर जोन-1 के द्वितीय श्रेणी लिपिक अनुराग शुक्ला और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विनय कुमार सिंह यादव का सितंबर महीने का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया गया है। दोनों कर्मचारियों से भी सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।

जनहित के कार्यों में लापरवाही पर सख्त रुख

समीक्षा में 15वें वित्त आयोग, अमृत योजना और वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े कार्यों में खामियां मिलीं। सड़क, जलापूर्ति, कूड़ा प्रबंधन, पार्क और झील विकास से जुड़े कामों में देरी को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि सात दिनों के भीतर जवाब नहीं देने या जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में शासन को अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति भेजी जाएगी। उन्होंने जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

 

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